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18 मार्च, 2022 को हैदराबाद विश्वविद्यालय में ‘1947 से लेकर भारत का आर्थिक विकास और आत्मनिर्भरता’ पर दो-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया. प्रो. रमणमूर्ति, संकाय-अध्यक्ष, अर्थशास्त्र संकाय ने इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों को स्वागत किया और संगोष्ठी के विषय के संक्षिप्त परिचय के साथ-साथ वर्तमान में संकाय की गतिविधियों की जानकारी भी दी, जिसमें कोविड लॉकडाउन की अवधि के दौरान की गतिविधियाँ भी शामिल है.

कुलपति महोदय प्रो. बासुतकर जगदीश्वर राव जी ने आजादी का अमृत महोत्सव श्रृंखला के अधीन अर्थशास्त्र संकाय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठी का उद्घाटन किया. अपने अध्यक्षीय भाषण में, प्रो. राव ने भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास की दिशा और आत्मनिर्भरता में वृद्धि का उल्लेख किया. आपने कहा कि वर्तमान संगोष्ठी जैसे शैक्षणिक कार्यक्रमों की समकालीन प्रासंगिकता है, जहाँ विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और मानविकी सहित शिक्षा की विभिन्न शाखाओं के सार्वजनिक मुद्दों को, विशेष रूप से आम लोगों की बुनियादी जरूरतों को संबोधित करने के लिए एक मंच पर एकत्रित होना चाहिए. प्रो. एन.आर. भानुमूर्ति, कुलपति, डॉ. बी.आर. आंबेडकर अर्थशास्त्र संकाय, बेंगलुरू विश्वविद्यालय ने अतिथि के रूप में मुख्य भाषण दिया. प्रो. भानुमूर्ति ने अर्थशास्त्र के प्रत्येक क्षेत्र से संबंधित डेटाबेस विकसित करने के महत्व पर जोर दिया, जो अनुसंधान और नीति निर्माण प्रक्रिया के मार्ग को प्रशस्त कर सकता है. प्रो. एस. इंद्रकांत, अभ्यागत प्रोफेसर, आर्थिक और सामाजिक अध्ययन केंद्र, हैदराबाद कार्यक्रम के सम्मानित अतिथि थे, जिन्होंने स्वतंत्रता के बाद से भारत में कृषि विकास की प्रक्रिया पर संबोधित किया और स्वतंत्रता के समग्र विचार में आर्थिक स्वतंत्रता के महत्व पर प्रकाश डाला. प्रो. एल. वेंकटाचलम, प्रोफेसर, मद्रास विकास अध्ययन संस्थान, जो सम्मानित अतिथि भी थे, ने देश भर में विकासात्मक प्रथाओं में पर्यावरण संबंधी चिंताओं पर व्याख्यान दिया तथा जीवन की गुणवत्ता के साथ-साथ देश में कृषि संबंधी समस्याओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया.

प्रो. अश्विनी महाजन, दिल्ली विश्वविद्यालय ने संगोष्ठी में अपने विशेष भाषण में व्यापार और विकास पर विशेष ध्यान देते हुए आत्मनिर्भर भारत के विषय पर प्रकाश डाला. प्रो. महाजन ने पिछले कई वर्षों में पूर्व सरकारों की आर्थिक नीतियों में आत्मनिर्भरता के विचारों का विश्लेषण किया. इसके अलावा, वक्ता ने कहा कि कोविड-19 महामारी ने भारत जैसे देशों के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता की आवश्यकता को दोहराया है. संगोष्ठी के संयोजक डॉ. कृष्णा रेड्डी चिट्टेड़ि ने उद्घाटन सत्र की कार्यवाही का संचालन किया और डॉ. प्रज्ञा परमिता मिश्रा ने औपचारिक धन्यवाद प्रस्ताव ज्ञापित किया.